मैं भारत में रह रहे उन लाखों लोगों में से एक हूं जो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, और मैंने देखा है कि कैसे छोटी गलतियां बड़े कर्ज का कारण बन जाती हैं। अगर आप भी क्रेडिट कार्ड यूजर हैं या नया कार्ड लेने की सोच रहे हैं, तो यह जानकारी आपके लिए है।
मैंने अपने अनुभव में देखा है कि ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और बाद में पछताते हैं। 2025 में भारत की बदलती आर्थिक स्थिति में common credit card mistakes that lead to debt and how to avoid them को समझना और भी जरूरी हो गया है।
मैं इस लेख में तीन मुख्य बातें बताऊंगा जो मेरे काम आई हैं: पहले, मैं बताऊंगा कि क्रेडिट कार्ड की सबसे आम गलतियां कौन सी हैं जो लोगों को कर्ज के जाल में फंसाती हैं। दूसरे, मैं उच्च ब्याज दरों और छुपी हुई फीस से बचने के तरीके शेयर करूंगा। तीसरे, मैं स्मार्ट क्रेडिट कार्ड उपयोग की रणनीति बताऊंगा जो आपके क्रेडिट स्कोर को बेहतर बनाने में मदद करेगी।
क्रेडिट कार्ड के सबसे आम गलतियां जो कर्ज में फंसाती हैं

न्यूनतम राशि का भुगतान करने की आदत
मैंने देखा है कि यह सबसे बड़ा जाल है जिसमें ज्यादातर लोग फंस जाते हैं। जब मेरा पहला क्रेडिट कार्ड आया था, मैं भी यही सोचता था कि न्यूनतम राशि देकर मैं अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा हूं। लेकिन यह एक महंगी गलती थी।
न्यूनतम राशि का भुगतान करने का मतलब है कि मैं बाकी 95% राशि पर आमतौर पर 3-3.6% मासिक ब्याज लगता है, जो सालाना 36-42% तक हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर मेरा क्रेडिट कार्ड बिल 50,000 रुपये है और मैं केवल 2,500 रुपये (5%) का भुगतान करता हूं, तो बचे 47,500 रुपये पर मुझे हर महीने लगभग 1,425-1,710 रुपये ब्याज देना पड़ सकता है। मैंने 2025 में देखा है कि त्योहारों के सीजन में लोग अक्सर न्यूनतम भुगतान करके फंस जाते हैं, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ती जा रही हैं।
न्यूनतम भुगतान के नुकसान:
- साल भर में 42% तक ब्याज दर
- कर्ज कम होने की बजाय बढ़ता जाता है
- क्रेडिट स्कोर पर नकारात्मक प्रभाव
- वित्तीय तनाव और चिंता
मैं हमेशा पूरा बिल चुकाने की कोशिश करता हूं। यदि पैसे की कमी हो तो मैं किसी दोस्त या रिश्तेदार से उधार लेकर भी पूरा बिल भरता हूं, क्योंकि उनसे मिलने वाला ब्याज क्रेडिट कार्ड के ब्याज से कहीं कम होता है।
क्रेडिट कार्ड को नकदी निकासी के लिए उपयोग करना
यह मेरी सबसे बड़ी गलती थी जो मैंने अपने शुरुआती दिनों में की। मुझे लगता था कि ATM से पैसे निकालना एक सामान्य सुविधा है, लेकिन यह एक महंगा गलतफहमी था।
Cash Advance या नकदी निकासी की फीस देखकर मेरे होश उड़ गए थे:
- तत्काल शुल्क: 2.5% से 3.5% निकली गई राशि पर
- ब्याज दर: आमतौर पर 36-42% सालाना (कुछ मामलों में 45% तक, तुरंत शुरू होता है)
- अतिरिक्त ATM शुल्क: 100-500 रुपये प्रति लेनदेन
| निकली गई राशि | तत्काल शुल्क (3%) | मासिक ब्याज (3.5%) | कुल लागत |
|---|---|---|---|
| 10,000 | 300 | 350 | 650+ |
| 25,000 | 750 | 875 | 1,625+ |
| 50,000 | 1,500 | 1,750 | 3,250+ |
मैं अब कभी भी क्रेडिट कार्ड से नकदी नहीं निकालता। यदि मुझे तत्काल पैसों की जरूरत होती है, तो मैं Personal Loan या किसी दोस्त से उधार लेने को प्राथमिकता देता हूं।

मल्टिपल क्रेडिट कार्ड्स का अनावश्यक उपयोग
मेरे पास एक समय 5 क्रेडिट कार्ड्स थे। हर बैंक वाला अलग-अलग ऑफर लेकर आता था और मैं मान जाता था। यह मेरी बहुत बड़ी गलती थी।
मल्टिपल कार्ड्स की समस्याएं:
- हर कार्ड की अलग-अलग due date और billing cycle
- Annual fee का बोझ (हर कार्ड पर 500-5,000 रुपये)
- खर्च पर नियंत्रण खोना
- EMI और बिलों का confusion
मैंने महसूस किया कि जब मेरे पास 2-3 कार्ड होते थे, तो मैं ज्यादा खर्च करता था क्योंकि मुझे लगता था कि मेरे पास ज्यादा “available money” है। यह एक भ्रम था।
अब मैं केवल 2 कार्ड रखता हूं – एक primary और एक backup के लिए। मेरा सुझाव है कि शुरुआत में केवल 1 कार्ड रखें और उसका सही उपयोग सीखें।
बिलिंग साइकल और ड्यू डेट को नजरअंदाज करना
यह तकनीकी लगता है, लेकिन मैंने सीखा है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है। मैं पहले कभी ध्यान नहीं देता था कि मेरा billing cycle कब से कब तक है और due date क्या है।
बिलिंग साइकल समझना:
- Statement Generate Date: जब बिल बनता है
- Payment Due Date: भुगतान की आखिरी तारीख
- Grace Period: ब्याज-मुक्त अवधि (20-50 दिन)
मैंने एक simple trick सीखी है – मैं हमेशा अपने salary date के 2-3 दिन बाद due date रखने के लिए बैंक से request करता हूं। इससे मुझे पैसों की कमी नहीं होती।
Late Payment के नुकसान:
- Late fee: 100-1,500 रुपये
- Credit score में गिरावट
- Future loans पर प्रभाव
- Over-limit charges का जोखिम
मैं अब auto-debit facility use करता हूं और साथ ही phone में reminder भी set करता हूं। यह छोटी सी आदत मुझे हजारों रुपये बचाती है।
उच्च ब्याज दरों और फीस के जाल से कैसे बचें

हिडन चार्जेस और फीस को समझना
मैंने अपने कई सालों के अनुभव में देखा है कि ज्यादातर लोग क्रेडिट कार्ड की छुपी हुई फीस के बारे में नहीं जानते। जब मैंने पहली बार अपना क्रेडिट कार्ड लिया था, मुझे भी नहीं पता था कि इसमें कितनी सारी छुपी हुई चार्जेस होती हैं।
मुख्य हिडन चार्जेस जिनसे मैं सावधान रहता हूं:
- फॉरेन ट्रांजैक्शन फीस: अगर मैं विदेश में कार्ड यूज़ करूं तो 2-4% तक चार्ज लगता है
- फ्यूल सरचार्ज: पेट्रोल पंप पर 1% एक्स्ट्रा फीस
- ओवरलिमिट चार्जेस: लिमिट से ज्यादा खर्च करने पर ₹500-1000 तक पेनल्टी
- कैश एडवांस फीस: ATM से कैश निकालने पर 2.5-3.5% चार्ज
- रिप्लेसमेंट कार्ड फीस: कार्ड खो जाने पर नया बनवाने का चार्ज
मैं हमेशा अपने स्टेटमेंट को ध्यान से चेक करता हूं और किसी भी अनजान चार्ज के लिए बैंक से तुरंत संपर्क करता हूं।
वार्षिक फीस माफी की रणनीति अपनाना
मैंने सीखा है कि अगर आप सही तरीके से बात करें तो वार्षिक फीस माफ कराई जा सकती है। मैं हर साल अपने बैंक से बात करके अपनी एनुअल फीस माफ कराता हूं।
मेरी प्रभावी रणनीति:
- स्पेंड टारगेट पूरा करना: मैं साल भर में निर्धारित राशि खर्च करके फीस वेवर पाता हूं
- कस्टमर केयर से नेगोसिएशन: मैं अपने अच्छे रिपेमेंट हिस्ट्री का फायदा उठाता हूं
- रिवॉर्ड पॉइंट्स का इस्तेमाल: अपने जमे हुए पॉइंट्स से फीस पे करता हूं
- अल्टरनेट कार्ड का ऑप्शन: अगर एक कार्ड की फीस ज्यादा है तो दूसरे कार्ड पर स्विच करने की बात करता हूं
| वार्षिक खर्च | फीस वेवर संभावना |
|---|---|
| ₹1 लाख से कम | कम चांस |
| ₹1-2 लाख | मध्यम चांस |
| ₹2 लाख से ज्यादा | अच्छे चांस |

कैश एडवांस चार्जेस से बचने के तरीके
मैं कभी भी अपने क्रेडिट कार्ड से कैश नहीं निकालता क्योंकि इसमें बहुत भारी चार्जेस लगते हैं। जब मैंने पहली बार ₹10,000 कैश निकाला था, तो मुझे ₹300 फीस और 42% सालाना ब्याज देना पड़ा था।
कैश एडवांस से बचने के मेरे तरीके:
- इमरजेंसी फंड रखना: मैं हमेशा 3-6 महीने का खर्च अपने सेविंग अकाउंट में रखता हूं
- डेबिट कार्ड का इस्तेमाल: कैश की जरूरत हो तो डेबिट कार्ड से निकालता हूं
- UPI और डिजिटल पेमेंट: जहां भी हो सके, डिजिटल पेमेंट करता हूं
- फ्रेंड्स और फैमिली से लेना: अगर जरूरी हो तो घर से पैसे मांग लेता हूं
लेट पेमेंट पेनल्टी से बचने के उपाय
मैं कभी भी अपना क्रेडिट कार्ड बिल लेट नहीं करता क्योंकि इससे न केवल पेनल्टी लगती है बल्कि क्रेडिट स्कोर भी खराब होता है। मेरे पास एक सिस्टम है जिससे मैं हमेशा टाइम पर पेमेंट करता हूं।
मेरे टाइम पर पेमेंट के तरीके:
- ऑटो-पे सेट करना: मैंने अपने सभी कार्ड्स में ऑटो-पे लगाया है
- मल्टिपल रिमाइंडर: फोन में 3 अलग-अलग डेट पर अलार्म सेट करता हूं
- बिल जेनरेशन के तुरंत बाद पेमेंट: स्टेटमेंट आते ही पेमेंट कर देता हूं
- मिनिमम भी नहीं, फुल पेमेंट: मैं हमेशा पूरा बिल भरता हूं, मिनिमम नहीं
लेट पेमेंट चार्जेस की तुलना:
| बैंक | लेट पेमेंट फीस | ब्याज दर |
|---|---|---|
| SBI | ₹500-1200 | 3.5% प्रति महीना |
| HDFC | ₹500-1300 | 3.49% प्रति महीना |
| ICICI | ₹450-1200 | 3.5% प्रति महीना |
मैं अपने कैलेंडर में हर महीने की 5 तारीख को पेमेंट करने का रिमाइंडर रखता हूं, चाहे बिल ₹100 का हो या ₹10,000 का।
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क्रेडिट स्कोर को खराब होने से कैसे रोकें

मैं आपको बताता हूं कि क्रेडिट कार्ड बिल का समय पर भुगतान आपके क्रेडिट स्कोर के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक है। मेरे अनुभव में, 35% तक क्रेडिट स्कोर सिर्फ पेमेंट हिस्ट्री पर निर्भर करता है। जब मैं अपने ग्राहकों को देखता हूं तो पाता हूं कि एक भी मिस्ड पेमेंट आपके स्कोर को 50-100 अंक तक गिरा सकती है।
मैं हमेशा सुझाता हूं कि ड्यू डेट से कम से कम 2-3 दिन पहले पेमेंट करें। ऑटो-डेबिट सेट अप करना भी बेहतरीन विकल्प है। अगर आप पूरा अमाउंट नहीं दे सकते तो कम से कम मिनिमम अमाउंट जरूर दें, लेकिन ध्यान रखें कि यह लंबे समय तक ठीक नहीं है।
पेमेंट डेट ट्रैक करने के तरीके:
- मोबाइल रिमाइंडर सेट करें
- कैलेंडर में मार्क करें
- बैंक की SMS अलर्ट एक्टिवेट करें
- ऑटो-पे सुविधा का इस्तेमाल करें
क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो को 30% से कम रखना
मैं यह बात बार-बार कहता हूं कि आपका क्रेडिट यूटिलाइजेशन रेशियो 30% से कम होना चाहिए। मेरी राय में, इसे 10-15% तक रखना सबसे अच्छा है। यह आपके क्रेडिट स्कोर का 30% हिस्सा प्रभावित करता है।
अगर आपकी क्रेडिट लिमिट ₹1 लाख है, तो मैं सुझाता हूं कि ₹30,000 से ज्यादा कभी न खर्च करें। मैंने देखा है कि जो लोग अपनी पूरी लिमिट का इस्तेमाल करते हैं, उनका स्कोर तेजी से गिरता है।
यूटिलाइजेशन कम रखने की ट्रिक्स:
| रणनीति | फायदा |
|---|---|
| मल्टिपल क्रेडिट कार्ड | लोड डिस्ट्रिब्यूशन |
| मिड-साइकल पेमेंट | बैलेंस कम दिखता है |
| क्रेडिट लिमिट बढ़ाना | रेशियो अपने आप कम हो जाता |
मैं अपने ग्राहकों को सलाह देता हूं कि महीने में दो बार पेमेंट करें – एक बार मिड-साइकल और एक बार ड्यू डेट पर।
क्रेडिट इंक्वायरी को सीमित करने के फायदे
मेरे अनुभव में, बहुत ज्यादा क्रेडिट इंक्वायरी आपके स्कोर को नुकसान पहुंचाती है। हार्ड इंक्वायरी आपके स्कोर को 5-10 अंक तक गिरा सकती है और यह 2 साल तक आपकी रिपोर्ट में रहती है।
मैं सुझाता हूं कि एक साल में 2-3 से ज्यादा क्रेडिट एप्लिकेशन न करें। अगर आपको लोन या क्रेडिट कार्ड की जरूरत है तो 14-45 दिन के अंदर सभी एप्लिकेशन कर दें – इससे सभी इंक्वायरी एक ही मानी जाती है।
इंक्वायरी कम करने के उपाय:
- प्री-अप्रूवल ऑफर का फायदा उठाएं
- रिसर्च करके ही अप्लाई करें
- एक समय में सिर्फ एक प्रोडक्ट के लिए अप्लाई करें
- सॉफ्ट चेक वाली सर्विसेज का इस्तेमाल करें
मैं यह भी बताना चाहूंगा कि अपना क्रेडिट स्कोर चेक करना (सॉफ्ट इंक्वायरी) आपके स्कोर को प्रभावित नहीं करता। आप महीने में एक बार अपना स्कोर जरूर चेक करें।
स्मार्ट क्रेडिट कार्ड उपयोग की रणनीति

रिवार्ड्स और कैशबैक का सही उपयोग
मैं हमेशा अपने ग्राहकों से कहता हूं कि रिवार्ड्स और कैशबैक क्रेडिट कार्ड के सबसे बड़े फायदे हैं, लेकिन इनका गलत उपयोग आपको नुकसान में डाल सकता है। मेरा अनुभव कहता है कि रिवार्ड्स के चक्कर में लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा खर्च करते हैं।
मैं हमेशा सलाह देता हूं कि पहले अपनी मासिक खर्च की आदतों को समझें। अगर आप ज्यादातर ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं, तो ई-कॉमर्स कैटेगरी में अच्छे रिवार्ड्स देने वाले कार्ड चुनें। पेट्रोल पर ज्यादा खर्च करते हैं तो फ्यूल कार्ड बेहतर होगा।
| कैटेगरी | सामान्य रिवार्ड्स रेट | मेरी सलाह |
|---|---|---|
| ग्रॉसरी | 2-5% कैशबैक | महीने की शुरुआत में ही खरीदारी करें |
| फ्यूल | 1-4% रिवार्ड्स | कैपिंग लिमिट चेक करें |
| डाइनिंग | 5-10% रिवार्ड्स | स्पेशल ऑफर्स का फायदा उठाएं |
मैं अपने ग्राहकों को बताता हूं कि रिवार्ड्स पॉइंट्स की एक्सपायरी डेट होती है। मैंने देखा है कि कई लोग हजारों रुपए के पॉइंट्स खो देते हैं क्योंकि वे समय पर रिडीम नहीं करते।
EMI कन्वर्जन के फायदे और नुकसान
मेरे 15 साल के बैंकिंग एक्सपीरियंस में मैंने देखा है कि EMI कन्वर्जन एक दोधारी तलवार है। बहुत से लोग समझते हैं कि यह उनकी समस्या का आसान समाधान है, लेकिन वास्तविकता कुछ और है।
EMI कन्वर्जन के फायदे:
- तुरंत कैश फ्लो की समस्या का समाधान
- बड़े पेमेंट को छोटे हिस्सों में बांट सकते हैं
- क्रेडिट स्कोर पर तत्काल नकारात्मक प्रभाव नहीं
EMI कन्वर्जन के नुकसान:
- 12-18% तक अतिरिक्त ब्याज लग सकता है
- प्रोसेसिंग फीस अलग से देनी पड़ती है
- मिनिमम लॉक-इन पीरियड होता है
मैं हमेशा कहता हूं कि EMI कन्वर्जन तभी करें जब यह वास्तव में जरूरी हो। अगर आपके पास 2-3 महीने में पैसे आने की उम्मीद है, तो बेहतर है कि मिनिमम अमाउंट पे करके इंतजार करें।

बैलेंस ट्रांसफर ऑप्शन का बुद्धिमानी से उपयोग
बैलेंस ट्रांसफर को मैं “कर्ज की अदला-बदली” कहता हूं। यह तब फायदेमंद है जब आप अपने मौजूदा कार्ड पर 36-42% का ब्याज दे रहे हों और दूसरा बैंक आपको 0-12% की दर पर ट्रांसफर की सुविधा दे रहा हो।
मैंने अपने ग्राहकों के लिए यह चेकलिस्ट बनाई है:
बैलेंस ट्रांसफर से पहले चेक करें:
- नए कार्ड की ब्याज दर promotional पीरियड के बाद क्या होगी
- ट्रांसफर फीस कितनी है (आमतौर पर 1-3%)
- कितने महीने का बेनिफिट मिल रहा है
- क्या आप promotional पीरियड में पूरा अमाउंट चुका पाएंगे
मेरी सलाह है कि बैलेंस ट्रांसफर के बाद पुराने कार्ड को तुरंत बंद न करें। 2-3 महीने तक दोनों कार्ड रखें ताकि किसी इमरजेंसी में काम आ सके।
इमरजेंसी के लिए क्रेडिट लिमिट का संरक्षण
मैं अपने हर ग्राहक को बताता हूं कि क्रेडिट कार्ड आपकी इमरजेंसी फंड की तरह काम कर सकता है, लेकिन केवल तभी जब आप इसका सही तरीके से उपयोग करें। मेरा मानना है कि आपकी कुल क्रेडिट लिमिट का 70% से ज्यादा कभी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
क्रेडिट लिमिट संरक्षण की मेरी रणनीति:
- 30% रूल फॉलो करें: मैं अपने रोजमर्रा के खर्च के लिए केवल 30% क्रेडिट लिमिट का उपयोग करता हूं
- 40% इमरजेंसी के लिए रिज़र्व रखें: मेडिकल इमरजेंसी या अचानक की यात्रा के लिए
- 30% बिल्कुल टच न करें: यह आपका अल्टिमेट सेफ्टी नेट है
मैंने देखा है कि जो लोग अपनी पूरी क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल करते हैं, वे मुश्किल के समय फंस जाते हैं। अगर आपकी लिमिट 1 लाख है और आप 90 हजार इस्तेमाल कर चुके हैं, तो इमरजेंसी में आपके पास केवल 10 हजार बचे हैं।
मेरी व्यक्तिगत सलाह यह है कि हर 6 महीने में अपनी क्रेडिट लिमिट बढ़वाने का रिक्वेस्ट करें, लेकिन अपने खर्च का पैटर्न वही रखें। इससे आपका credit utilization ratio बेहतर होगा और इमरजेंसी फंड भी बढ़ेगा।
भारत में 2025 के नए नियम और सुझाव

RBI के नए क्रेडिट कार्ड नियमों का प्रभाव
मैंने 2024-25 में RBI के नए नियमों को बारीकी से देखा है और ये काफी गेम-चेंजिंग हैं। अब बैंकों को क्रेडिट कार्ड जारी करने से पहले ज्यादा सख्त इनकम वेरिफिकेशन करना पड़ता है। मेरे अनुभव में, ये एक अच्छी बात है क्योंकि अब लोगों को अपनी औकात से ज्यादा लिमिट नहीं मिलेगी।
नई लेंडिंग गाइडलाइंस में डेट-टू-इनकम (DTI) रेशियो पर जोर है, जहां बैंक कुल कर्ज (क्रेडिट कार्ड EMI सहित) को मासिक आय के 50-60% तक सीमित रखते हैं। मैंने 2025 में देखा है कि इससे घरेलू कर्ज बढ़ने से बचाव होता है, लेकिन यह क्रेडिट कार्ड्स के लिए सख्त नया नियम नहीं है – बल्कि सामान्य सलाह है। उदाहरण के लिए, अगर आपकी आय 1 लाख रुपये है, तो कुल EMI 50,000 रुपये तक रखें ताकि तनाव न हो।
सबसे बड़ा बदलाव है कार्ड एक्टिवेशन की सख्ती। अब नया क्रेडिट कार्ड लेने के बाद OTP-आधारित सहमति जरूरी है, और अगर कार्ड 30 दिनों तक निष्क्रिय रहता है, तो बैंक पुष्टि मांगता है। मैं हमेशा अपने दोस्तों को सलाह देता हूं कि टर्म्स एंड कंडीशंस को ध्यान से पढ़ें, क्योंकि 2025 में डिजिटल लोन के लिए न्यूनतम 1 दिन का कूलिंग-ऑफ पीरियड है, लेकिन क्रेडिट कार्ड्स के लिए यह लागू नहीं होता।
| पुराना नियम | नया नियम (2025) |
|---|---|
| तुरंत एक्टिवेशन | 3 दिन कूलिंग ऑफ पीरियड |
| बेसिक इनकम चेक | स्ट्रिक्ट वेरिफिकेशन |
| कोई EMI कैप नहीं | मैक्स 50% इनकम |
डिजिटल पेमेंट ट्रेंड्स के साथ तालमेल बिठाना
मैं UPI और क्रेडिट कार्ड को लिंक करने के फायदे देख रहा हूं। RuPay क्रेडिट कार्ड्स अब UPI पर काम करते हैं, जो मेरे लिए एक बड़ी सुविधा है। छोटी दुकानों पर भी अब मैं क्रेडिट का फायदा उठा सकता हूं।
BNPL (Buy Now Pay Later) का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि यह क्रेडिट कार्ड का बेहतर विकल्प हो सकता है छोटी खरीदारी के लिए। लेकिन मैं सावधान रहता हूं क्योंकि कई BNPL प्लेटफॉर्म्स पर हिडन चार्जेज होते हैं।
मोबाइल वॉलेट इंटीग्रेशन भी बेहद फायदेमंद है। मैं अपने क्रेडिट कार्ड को Google Pay और PhonePe से लिंक करके कैशबैक की दोहरी फायदा उठाता हूं:
- क्रेडिट कार्ड पर रिवार्ड पॉइंट्स
- UPI ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त कैशबैक
- तुरंत पेमेंट कन्फर्मेशन
फाइनेंशियल प्लानिंग में क्रेडिट कार्ड की भूमिका
मैं अपनी मंथली बजटिंग में क्रेडिट कार्ड को एक टूल के रूप में इस्तेमाल करता हूं। मेरी सलाह है कि आप क्रेडिट लिमिट का सिर्फ 30% ही यूज करें। इससे आपका क्रेडिट स्कोर बेहतर रहता है।
इमरजेंसी फंड बनाने में भी क्रेडिट कार्ड मददगार है। मैं हमेशा एक सेपरेट क्रेडिट कार्ड रखता हूं जो सिर्फ मेडिकल इमरजेंसी या अचानक जरूरतों के लिए है। इसे मैं ज्यादा यूज नहीं करता।
मेरी फाइनेंशियल प्लानिंग स्ट्रैटेजी:
- 50% इनकम – जरूरी खर्च (किराया, EMI, बिल)
- 30% इनकम – लाइफस्टाइल खर्च (यहां क्रेडिट कार्ड रिवार्ड्स का फायदा)
- 20% इनकम – सेविंग्स और इन्वेस्टमेंट
टैक्स सेविंग में भी मैं क्रेडिट कार्ड का स्मार्ट यूज करता हूं। जैसे ELSS फंड्स में SIP पेमेंट क्रेडिट कार्ड से करके रिवार्ड पॉइंट्स और टैक्स बेनिफिट दोनों लेता हूं।
2025 में क्रिप्टो और स्टॉक इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म्स भी क्रेडिट कार्ड एक्सेप्ट कर रहे हैं। मैं इसे रिस्की मानता हूं क्योंकि इन्वेस्टमेंट में नुकसान हो तो भी कर्ज चुकाना पड़ता है।

मैंने इस लेख में क्रेडिट कार्ड से जुड़ी उन सभी आम गलतियों के बारे में बताया है जो लाखों भारतीयों को कर्ज के जाल में फंसा रही हैं। मिनिमम पेमेंट का जाल, बिना सोचे-समझे खर्च करना, और क्रेडिट स्कोर को नज़रअंदाज़ करना – ये सब गलतियां आपकी वित्तीय स्वतंत्रता को खत्म कर सकती हैं। मैं चाहता हूं कि आप इन बातों को दिल से लगाएं और अपनी पैसों की आदतों को बदलें।
2025 में नए नियम आने वाले हैं और मैं मानता हूं कि यह आपके लिए एक नई शुरुआत का मौका है। आज से ही अपने क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट को ध्यान से देखना शुरू करें, पूरा बिल चुकाने की आदत डालें, और हर खर्च से पहले दो बार सोचें। मैं आपसे विनती करता हूं कि इन सुझावों को अमल में लाएं – आपका भविष्य इन छोटे फैसलों पर ही निर्भर करता है।

