No Cost EMI का सच: Zero Interest भी महंगा क्यों?

‘नो-कॉस्ट’ EMI का सच: क्यों ‘ज़ीरो इंटरेस्ट’ भी आपके पैसे खर्च करवा सकता है

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं या महंगे गैजेट्स खरीदने की सोच रहे हैं, तो आपको No Cost EMI के आकर्षक ऑफर्स दिखे होंगे। “बिना किसी अतिरिक्त लागत के किस्तों में भुगतान करें” – यह बैनर सुनने में बहुत अच्छा लगता है, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही होती है।

यह गाइड उन लोगों के लिए है जो EMI के जरिए खरीदारी करने की सोच रहे हैं या पहले से ही इन ऑफर्स में फंस चुके हैं। मैं आपको नो कॉस्ट ईएमआई का सच दिखाऊंगा और बताऊंगा कि कैसे ये ज़ीरो इंटरेस्ट ईएमआई भी आपको महंगी पड़ सकती हैं।

इस पोस्ट में हम देखेंगे कि ईएमआई छुपे हुए चार्ज कहां मिलते हैं और कैसे प्रोसेसिंग फीस, GST, और खोए हुए डिस्काउंट आपकी जेब पर भारी पड़ते हैं। साथ ही मैं आपको सिखाऊंगा कि कैसे इंस्टेंट डिस्काउंट बनाम ईएमआई की तुलना करके सबसे बेहतर डील चुनें। अंत में, हम उन स्थितियों पर भी चर्चा करेंगे जहां नो-कॉस्ट EMI वाकई फायदेमंद हो सकती है।

No Cost EMI की वास्तविकता को समझें

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ब्रांड या दुकानदार बैंक को ब्याज की भरपाई करते हैं

जब आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो असल में उत्पाद बनाने वाली कंपनी या ऑनलाइन स्टोर आपकी जगह बैंक को ब्याज देता है। यह एक चालाक बिक्री ट्रिक है, जहां वे अपने लाभ से कटौती करके ग्राहकों को लुभाते हैं। प्लेटफॉर्म जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट इस रणनीति से बिक्री बढ़ाते हैं, लेकिन 2025 में आरबीआई के नए नियमों के तहत अब ऐसी स्कीम्स में पूरी पारदर्शिता जरूरी है – कोई छिपा शुल्क नहीं छिपाया जा सकता।

उदाहरण लीजिए: अगर आप 30,000 रुपये का फोन 6 महीने की ईएमआई पर लेते हैं, तो स्टोर बैंक को 2,000-3,000 रुपये का ब्याज अपनी जेब से दे सकता है। यह रकम अक्सर उत्पाद की मूल कीमत में पहले से जोड़ी जाती है, जैसे एक मार्केटिंग का मुखौटा।

सबको फायदा लगता है, लेकिन हकीकत अलग है

बाहरी नजर से नो-कॉस्ट ईएमआई सबके लिए फायदेमंद दिखती है: आपको बिना ब्याज की किस्तें, स्टोर को ज्यादा बिक्री, और बैंक को गारंटीड कमाई। लेकिन असल में लागतें सिर्फ इधर-उधर शिफ्ट होती हैं, गायब नहीं। कुछ बैंक, जैसे आईसीआईसीआई, पूरी रकम पहले चार्ज करते हैं और फिर 90 दिनों बाद ब्याज को छूट के रूप में रिफंड करते हैं – यह आरबीआई की 2025 गाइडलाइंस के मुताबिक अब और साफ-साफ बताया जाना चाहिए।

वास्तविक स्थिति इस प्रकार है:

पक्षदिखने वाला लाभअसल हकीकत
ग्राहकबिना ब्याजछूट के मौके गंवाने और छिपे शुल्क से नुकसान
स्टोरबिक्री में उछालअपने मुनाफे से कटौती
बैंकनिश्चित ब्याजप्रोसेसिंग फीस से अतिरिक्त कमाई, लेकिन 2026 से प्री-पेमेंट चार्ज हटने से बदलाव

छुपी हुई लागतें आपके बजट को प्रभावित कर सकती हैं

ईएमआई के छिपे शुल्क से आपका कुल खर्च बढ़ सकता है। 2025 में आरबीआई के नियमों ने लेट पेमेंट पेनल्टी हटा दी है, लेकिन अभी भी प्रोसेसिंग और जीएसटी जैसे शुल्क बाकी हैं। मुख्य छिपे शुल्क हैं:”

मुख्य छुपी हुई लागतें:

  1. प्रोसेसिंग फीस: 99 से 500 रुपये तक (+ जीएसटी) – यह एकबारगी शुल्क है, लेकिन ‘नो-कॉस्ट’ के नाम पर अक्सर नजरअंदाज किया जाता है।
  2. ब्याज पर जीएसटी: नो-कॉस्ट ईएमआई में भी ब्याज हिस्से पर 18% जीएसटी लगता है, भले ही स्टोर इसे कवर करे।
  3. प्री-क्लोजर शुल्क: 3% + जीएसटी अगर आप जल्दी लोन चुकाना चाहें – हालांकि 2026 से आरबीआई के नए नियमों में फ्लोटिंग रेट लोन पर यह शुल्क हट जाएगा।
  4. छूट वापसी: अगर ईएमआई रद्द करें, तो बैंक जैसे एचडीएफसी टीएंडसी में कहते हैं कि इंस्टेंट कैशबैक काट लिया जाएगा।

एक असली उदाहरण: 40,000 रुपये के लैपटॉप की ईएमआई 6 महीने बाद बंद करने पर:

  • पहली ईएमआई का ब्याज: 533 रुपये
  • जीएसटी: 96 रुपये
  • प्री-क्लोजर फीस: 1,188 रुपये
  • प्रोसेसिंग फीस: 353 रुपये कुल अतिरिक्त: 2,170 रुपये
  1. यह दिखाता है कि छिपे शुल्क, खासकर अगर ईएमआई जल्दी बंद हो, आपके बजट पर भारी पड़ सकते हैं – लेकिन आरबीआई की 2025 गाइडलाइंस के तहत अब 30 दिनों की ग्रेस पीरियड है जहां लेट पेमेंट पर पेनल्टी नहीं लगेगी।”

EMI में छुपे हुए शुल्क और लागतों की पहचान करें

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प्रोसेसिंग और सुविधा शुल्क (1-3 प्रतिशत तक)

जब आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो सबसे पहले आपसे प्रोसेसिंग फीस ली जाती है। यह फीस आमतौर पर ₹99 से शुरू होकर खरीदारी की राशि के 1-3% तक हो सकती है। उदाहरण के लिए, यदि आप ₹43,000 का सामान खरीदते हैं, तो आपसे ₹99 प्रोसेसिंग फीस ली जाएगी। यह फीस केवल एक बार देनी होती है, लेकिन इसे “नो-कॉस्ट” के नाम पर छुपा दिया जाता है।

फीस पर 18 प्रतिशत GST का अतिरिक्त बोझ

प्रोसेसिंग फीस के साथ-साथ आपको 18% GST भी देना पड़ता है। यदि आपकी प्रोसेसिंग फीस ₹99 है, तो इस पर ₹18 GST अलग से जुड़ेगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ब्याज पर भी 18% GST लगता है, भले ही वह ब्याज मर्चेंट द्वारा डिस्काउंट के रूप में कवर किया जाए।

एक वास्तविक उदाहरण से समझें:

  • ₹43,000 की खरीदारी पर
  • प्रोसेसिंग फीस: ₹99
  • प्रोसेसिंग फीस पर GST: ₹18
  • ब्याज घटक पर GST: ₹400 (लगभग)
  • कुल अतिरिक्त लागत: ₹517

इस प्रकार आप वास्तव में ₹43,517 का भुगतान करते हैं, न कि ₹43,000 का।

EMI लेनदेन पर क्रेडिट कार्ड रिवार्ड्स की हानि

जब आप नो-कॉस्ट ईएमआई चुनते हैं, तो अधिकांश क्रेडिट कार्ड कंपनियां इन लेनदेन पर रिवार्ड पॉइंट्स या कैशबैक नहीं देतीं। सामान्य खरीदारी पर आपको 1-2% तक रिवार्ड मिल सकते हैं, लेकिन EMI लेनदेन को अलग श्रेणी में रखा जाता है। ₹50,000 की खरीदारी पर आप ₹500-1,000 तक के रिवार्ड्स खो सकते हैं।

रिटर्न पर भी फीस वापस नहीं मिलना

यदि आप सामान वापस करना चाहते हैं, तो आपकी प्रोसेसिंग फीस और GST वापस नहीं मिलते। केवल मुख्य राशि का रिफंड होता है। यह एक महत्वपूर्ण छुपी हुई लागत है जिसके बारे में अधिकांश ग्राहकों को पता नहीं होता। इसके अलावा, EMI रद्द करने पर भी अतिरिक्त शुल्क लग सकते हैं।

तुरंत भुगतान पर मिलने वाले छूट के अवसरों को न गंवाएं

Retail festive sale environment where “No Cost EMI” banner

त्योहारी सेल में कैशबैक और इंस्टेंट डिस्काउंट

त्योहारी सेल जैसे अमेज़न ग्रेट इंडियन फेस्टिवल 2025 में आपको इंस्टेंट छूट या नो-कॉस्ट ईएमआई के विकल्प मिलते हैं। इंस्टेंट छूट में विशिष्ट बैंक कार्ड से तुरंत पेमेंट पर बचत होती है।

उदाहरण: 50,000 रुपये का स्मार्टफोन पर 10% इंस्टेंट छूट से सिर्फ 45,000 रुपये देने पड़ते हैं। वहीं ईएमआई में कोई upfront छूट नहीं, पूरा 50,000 चुकाना पड़ता है। आईसीआईसीआई कार्ड इंस्टेंट छूट में अग्रणी है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा और फेडरल बैंक स्पेशल ऑफर्स देते हैं।

EMI चुनने पर प्राइस कट का नुकसान

नो-कॉस्ट ईएमआई चुनकर आप इंस्टेंट छूट से वंचित रह जाते हैं – दोनों एक साथ नहीं मिलते। 9 महीने की ईएमआई पर गणना:

  • इंस्टेंट छूट: 45,000 रुपये (तुरंत पेमेंट)
  • नो-कॉस्ट ईएमआई: 5,555.55 रुपये प्रति माह × 9

45,000 तुरंत न देकर ईएमआई चुनने पर आपको 2.16% मासिक रिटर्न (26% सालाना) कमाना पड़ेगा – जो मुश्किल है। फिनटेक ऐप्स जैसे LazyPay अब ईएमआई को आसान बनाते हैं, लेकिन छूट की तुलना जरूरी।

बड़ी खरीदारी पर छूट का फायदा शून्य ब्याज से अधिक हो सकता है

विभिन्न छूट प्रतिशत और अवधि पर देखें: 5% इंस्टेंट छूट पर:

  • 9 महीने ईएमआई: 1.04% मासिक रिटर्न (12.46% सालाना) जरूरी
  • 6 महीने ईएमआई: 1.49% मासिक रिटर्न (17.8% सालाना) जरूरी

10% इंस्टेंट छूट पर:

  • 6 महीने ईएमआई: 3.1% मासिक रिटर्न (37% सालाना) जरूरी

जितनी ज्यादा छूट और कम अवधि, उतनी इंस्टेंट छूट फायदेमंद। प्लस, ईएमआई पर जीएसटी अतिरिक्त – 2025 सेल में यह अंतर और साफ दिखा।

वास्तविक गणना के साथ लागत की तुलना करें

A realistic Indian electronics store checkout scene where a customer is choosing between “Instant Discount ₹45,000” and “No Cost EMI ₹50,000”

30,000 रुपये के फोन पर 2% फीस + जीएसटी से कुल 30,708 रुपये

नो-कॉस्ट ईएमआई में कई शुल्क जुड़ जाते हैं। बैंक अक्सर 2% प्रोसेसिंग फीस लेते हैं, यानी 600 रुपये, और उस पर 18% जीएसटी (108 रुपये)।

कुल: मूल कीमत 30,000 + फीस 600 + जीएसटी 108 = 30,708 रुपये

यह सिर्फ शुरुआत; लेट फीस या फोरक्लोजर अतिरिक्त। आरबीआई के 2025 नियमों से लेट पेमेंट पर 30 दिन ग्रेस है, लेकिन अभी भी सतर्क रहें।

5% upfront छूट से सिर्फ 28,500 रुपये

तुरंत पेमेंट पर 3-10% छूट मिलती है। 30,000 पर 5% छूट: 1,500 बचत, कुल 28,500 रुपये। बैंक ऑफर्स या सेल में यह आम।

EMI और कैश पेमेंट के बीच 2,208 रुपये का अंतर

अब जब हमने दोनों विकल्पों की वास्तविक गणना देखी है, तो नो कॉस्ट ईएमआई का सच साफ हो जाता है:

विकल्पकुल लागतअंतर
नो-कॉस्ट ईएमआई (फीस + जीएसटी)30,7082,208
कैश पेमेंट (5% छूट)28,500बेस

यह अंतर बढ़ सकता है अगर पेमेंट मिस हो – क्रेडिट स्कोर पर असर, लेकिन समय पर चुकाने से फायदा।”

यह वास्तविक उदाहरण स्पष्ट रूप से दिखाता है कि नो कॉस्ट ईएमआई नुकसान कितना महत्वपूर्ण हो सकता है और कैसे तुरंत भुगतान आपको अधिक बचत दिला सकता है।

No Cost EMI कब फायदेमंद हो सकता है

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जब वास्तव में कोई फीस न हो और EMI प्राइस कैश प्राइस के बराबर हो

नो-कॉस्ट ईएमआई तभी वास्तव में फायदेमंद होता है जब प्रोडक्ट की EMI प्राइस उसकी कैश प्राइस के बिल्कुल बराबर हो। इसका मतलब है कि आपको कोई अतिरिक्त प्रोसेसिंग फीस या छुपे हुए चार्ज नहीं देने पड़ते। ऐसी स्थिति में, आप केवल प्रोडक्ट की मूल कीमत को महीनों में बांटकर चुका रहे होते हैं।

यह तब संभव होता है जब रिटेलर या ब्रांड खुद ब्याज की राशि को अवशोषित करता है और उसे प्रोडक्ट की कीमत में नहीं जोड़ता। ऐसे मामलों में, आपको वास्तव में ज़ीरो इंटरेस्ट ईएमआई का फायदा मिलता है क्योंकि आपकी कुल भुगतान की गई राशि कैश पेमेंट के बराबर होती है।

3-6 महीने की छोटी अवधि और समय पर भुगतान की स्थिति में

छोटी अवधि के नो-कॉस्ट ईएमआई, विशेष रूप से 3-6 महीने की अवधि में, अधिक फायदेमंद हो सकते हैं। इसके पीछे कई कारण हैं:

  • कम रिस्क: छोटी अवधि में आपके भुगतान में चूक की संभावना कम होती है
  • बेहतर कैश फ्लो मैनेजमेंट: आप अपने पैसों को अन्य निवेश या जरूरी खर्चों में उपयोग कर सकते हैं
  • कम हिडन कॉस्ट: छोटी अवधि में बैंकों और रिटेलर्स द्वारा छुपे हुए चार्ज की संभावना कम होती है

समय पर भुगतान करना इस स्कीम की सफलता की कुंजी है। यदि आप हर महीने समय पर EMI का भुगतान करते हैं, तो आप लेट फीस, पेनल्टी चार्ज और अतिरिक्त ब्याज से बच सकते हैं।

ब्रांड द्वारा वास्तविक सब्सिडी दिए जाने पर

कभी-कभी बड़े ब्रांड्स अपने प्रोडक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए वास्तविक सब्सिडी प्रदान करते हैं। इन मामलों में, ब्रांड खुद बैंक को ब्याज की राशि का भुगतान करता है, जिससे आपको वास्तविक नो-कॉस्ट ईएमआई का फायदा मिलता है।

यह स्थिति तब होती है जब:

  • ब्रांड अपने नए प्रोडक्ट लॉन्च कर रहा हो
  • फेस्टिवल सीजन के दौरान स्पेशल ऑफर हो
  • ब्रांड की मार्केट शेयर बढ़ाने की रणनीति हो

ऐसे मामलों में, रिटेलर डिस्काउंट एडजस्टमेंट नहीं करता बल्कि ब्रांड द्वारा दी गई सब्सिडी का उपयोग करके आपको वास्तविक ज़ीरो इंटरेस्ट ईएमआई प्रदान करता है। यह सबसे आदर्श स्थिति होती है क्योंकि इसमें कोई छुपा हुआ नुकसान नहीं होता।

EMI लेने से पहले इन चेतावनी संकेतों पर ध्यान दें

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इंस्टेंट डिस्काउंट और कूपन का रद्द होना

जब आप नो कॉस्ट ईएमआई का विकल्प चुनते हैं, तो आपको तुरंत पता चल जाना चाहिए कि कई इंस्टेंट डिस्काउंट और कूपन अपने आप रद्द हो जाते हैं। अधिकांश ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर जब आप full payment करते हैं, तो आपको additional cashback, instant discount, या special coupon codes मिलते हैं। लेकिन EMI option select करने पर ये सभी benefits गायब हो जाते हैं।

उदाहरण के लिए, यदि आपको कोई smartphone ₹50,000 का मिल रहा है तो cash payment पर 10% instant discount (₹5,000) मिल सकती है। लेकिन EMI option चुनने पर यह discount automatically cancel हो जाती है। इससे आपकी actual cost बढ़ जाती है।

विभिन्न प्लेटफॉर्म पर कैश प्राइस से तुलना करना

अब जब आपको छुपे हुए चार्ज के बारे में पता चल गया है, तो विभिन्न प्लेटफॉर्म पर cash price की तुलना करना जरूरी है। अक्सर देखा गया है कि जब companies “zero interest EMI” offer करती हैं, तो वे product की base price को पहले से ही बढ़ा देती हैं।

आपको यह करना चाहिए:

  • Same product को different platforms पर check करें
  • Cash payment और EMI payment के बीच total cost की गणना करें
  • Hidden charges जैसे processing fees, GST, और convenience charges को जोड़ें
  • Real market price से compare करें

कई बार आप देखेंगे कि cash payment से आप 15-20% तक बचा सकते हैं।

प्री-क्लोज़र फीस और रिफंड नीति की जांच करना

ईएमआई हिडन कॉस्ट में से एक बड़ा हिस्सा pre-closure fees का होता है। यदि आप अपने EMI को जल्दी बंद करना चाहते हैं, तो आपको hefty charges देने पड़ सकते हैं। कई financial institutions 2-5% तक pre-closure penalty charge करते हैं।

साथ ही, product return की स्थिति में refund policy भी complex हो जाती है। EMI के case में:

  • Return process slow हो जाता है
  • Refund amount में से processing fees काट लिया जाता है
  • कई बार आपको EMI continue करनी पड़ती है जब तक refund process complete नहीं होता

क्रेडिट लिमिट ब्लॉक होने से यूटिलाइजेशन रेट पर प्रभाव

यह सबसे महत्वपूर्ण warning sign है जिसे अधिकतर लोग ignore कर देते हैं। जब आप credit card EMI लेते हैं, तो आपकी significant credit limit block हो जाती है। इससे आपका credit utilization ratio बढ़ जाता है, जो आपके CIBIL score पर negative impact डालता है।

उदाहरण के लिए:

  • यदि आपकी credit limit ₹1,50,000 है
  • आप ₹50,000 का EMI लेते हैं
  • तो आपका utilization ratio तुरंत 33% हो जाता है

Financial experts recommend करते हैं कि credit utilization 30% से कम रखें। High utilization ratio से:

  • Credit score decrease हो सकता है
  • Future loan approvals में problem हो सकती है
  • Interest rates बढ़ सकते हैं

इसलिए EMI लेने से पहले अपनी overall credit health को consider करना जरूरी है।

भुगतान में देरी के गंभीर परिणामों से बचें

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एक भी देर से भुगतान पर पेनल इंटरेस्ट और लेट फीस

नो-कॉस्ट EMI के साथ सबसे बड़ा जोखिम यह है कि एक भी EMI देर से जमा करने पर आपको भारी पेनल्टी का सामना करना पड़ सकता है। आपके नो कॉस्ट ईएमआई की व्यवस्था में यदि आप एक दिन भी देर करते हैं, तो:

  • लेट फीस: आम तौर पर EMI राशि का 1% से 2% तक लेट फीस लगता है
  • पेनल इंटरेस्ट: बकाया राशि पर 2% से 4% प्रति माह तक का अतिरिक्त ब्याज लग सकता है
  • ये चार्जेज तेजी से बढ़ते जाते हैं और आपके कुल repayment burden को काफी बढ़ा देते हैं

EMI का नियमित ब्याज दरों पर वापस आना

जैसे ही आप ज़ीरो इंटरेस्ट ईएमआई का भुगतान देर से करते हैं, आपकी पूरी नो कॉस्ट ईएमआई व्यवस्था समाप्त हो जाती है। अब तक जो भी instalments आपने “zero interest” पर चुकाई थीं, वे सभी नियमित ब्याज दरों पर convert हो जाती हैं।

इसका मतलब है:

  • आपकी पूरी outstanding amount पर regular credit card interest rate लगना शुरू हो जाता है
  • यह दर आम तौर पर 24% से 48% सालाना तक हो सकती है
  • ईएमआई हिडन कॉस्ट का असली चेहरा सामने आ जाता है

महंगे रिवॉल्विंग डेट और क्रेडिट स्कोर को नुकसान

एक बार जब आपकी नो कॉस्ट ईएमआई नुकसान में convert हो जाती है, तो यह revolving debt बन जाता है। इसके गंभीर परिणाम होते हैं:

क्रेडिट स्कोर पर प्रभाव:

  • केवल एक दिन की देरी से आपका CIBIL score 25 से 30 points तक गिर सकता है
  • एक महीने की देरी से 75 से 100 points तक का नुकसान हो सकता है
  • यह negative रिमार्क आपकी credit report में 7 साल तक रह सकता है

भविष्य की borrowing पर प्रभाव:

  • आपकी creditworthiness पर सवाल खड़े हो जाते हैं
  • भविष्य में loan या credit card approval मुश्किल हो जाता है
  • आप lenders के लिए high-risk borrower बन जाते हैं

Revolving debt का जाल:

  • High interest rates के कारण debt trap बनने का खतरा
  • Monthly minimum payments भी principal amount को कम नहीं करतीं
  • Financial instability और psychological stress बढ़ता जाता है

इसीलिए ज़ीरो इंटरेस्ट लोन भारत में लेते समय payment discipline बेहद जरूरी है। एक भी चूक आपकी पूरी financial planning को बिगाड़ सकती है।

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“नो-कॉस्ट” EMI की आकर्षक पेशकश के पीछे का सच अब आपके सामने है। प्रोसेसिंग फीस, छूट के अवसरों की हानि, और छुपे हुए शुल्कों के कारण यह “मुफ्त” विकल्प अक्सर महंगा साबित होता है। जब आप तुरंत भुगतान की छूट के बदले EMI चुनते हैं, तो वास्तविक लागत काफी बढ़ जाती है।

अगली बार जब आपको “नो-कॉस्ट” EMI का विकल्प दिखे, तो पहले सारी फीस और टैक्स जोड़कर वास्तविक गणना करें। सभी प्लेटफॉर्म पर तुरंत भुगतान के दाम से तुलना करें और केवल तभी EMI चुनें जब गणित सच में आपके पक्ष में हो। समय पर भुगतान की गारंटी हो तो ही यह विकल्प चुनें, क्योंकि एक भी देरी आपके क्रेडिट स्कोर और जेब दोनों को नुकसान पहुंचा सकती है।

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Disclaimer: यह लेख केवल सामान्य वित्तीय जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। EMI, क्रेडिट कार्ड और बैंक शर्तें समय-समय पर बदल सकती हैं। कोई भी वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपने बैंक की शर्तें और शुल्क संरचना अवश्य जांचें। लेखक किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

About Author:

Ishwar एक फाइनेंस ब्लॉगर हैं और PaisaForever के निर्माता हैं। वह भारतीय पाठकों के लिए निवेश, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो और वित्तीय योजना जैसे विभिन्न विषयों पर लिखते हैं।
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Ishwar Bulbule

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