फिजिकल गोल्ड पर ब्याज कैसे कमाएं — Gold Monetization Scheme की पूरी जानकारी !

क्या आपके घर के बैंक लॉकर में भी पुश्तैनी गहने या सोने के सिक्के बस यूं ही रखे हुए हैं? क्या आपको पता है कि भारतीय घरों और संस्थानों में लगभग 20,000 से 25,000 टन सोना निष्क्रिय पड़ा है? भारतीय लोग हर साल सोने पर लगभग ₹3–4 लाख करोड़ खर्च करते हैं, लेकिन यह सोना कोई वित्तीय रिटर्न नहीं देता ।

नमस्ते, मैं ईश्वर बुलबुले हूँ। ICICI Prudential में अपने 5 साल के अनुभव और भारतीय शेयर बाजार में 10+ सालों के निवेश सफर में मैंने एक बात बहुत करीब से देखी है—भारतीय निवेशक सुरक्षित निवेश के नाम पर ‘Dead Assets’ में पैसा फंसा कर रखते हैं। सोना एक बेहतरीन एसेट क्लास है, लेकिन जब तक यह लॉकर में बंद है, यह आपको कोई ब्याज नहीं देता।

मार्च 2025 में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) और भारत सरकार ने Gold Monetization Scheme (GMS) में कुछ बड़े बदलाव किए हैं । अगर आप जानना चाहते हैं कि अपने घर में रखे सोने से पैसे कैसे कमाएं, तो यह 2026 की सबसे विस्तृत गाइड आपके लिए है। आइए डेटा और तथ्यों के आधार पर समझते हैं कि यह स्कीम क्या है, कैसे काम करती है, और आपको इसमें निवेश करना चाहिए या नहीं।

Gold Monetization Scheme (GMS) क्या है?

Gold Monetization Scheme (GMS) भारत सरकार द्वारा 5 नवंबर 2015 को शुरू की गई एक प्रमुख योजना है । इसका मुख्य उद्देश्य घरों और संस्थानों में रखे निष्क्रिय सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाना है ।

सरल शब्दों में: जिस तरह आप बैंक में कैश जमा करके Fixed Deposit (FD) पर ब्याज कमाते हैं, उसी तरह GMS के तहत आप अपना भौतिक सोना (Physical Gold) बैंक में जमा कर सकते हैं और उस पर ब्याज कमा सकते हैं ।

इस योजना का मैक्रो-इकोनॉमिक कारण यह है कि भारत अपनी जरूरत का 800–900 टन सोना हर साल आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है । घरेलू सोने को रीसायकल करके सरकार इस आयात को कम करना चाहती है । इस स्कीम में आप कम से कम 10 ग्राम सोना (कच्चा सोना, सिक्के, या गहने) जमा कर सकते हैं ।

यह कैसे काम करता है — Step by Step (पूरी प्रक्रिया)

GMS infographic of step by step process

मेरे अनुभव में, लोग इस स्कीम से इसलिए दूर भागते हैं क्योंकि उन्हें प्रक्रिया जटिल लगती है। लेकिन 2026 में यह प्रक्रिया काफी स्पष्ट है। यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप गाइड दी गई है:

  1. बैंक शाखा जाएं: सबसे पहले किसी अधिकृत बैंक की GMS शाखा में जाएं (ध्यान दें, हर शाखा यह सुविधा नहीं देती) ।
  2. CPTC सेंटर जाएं: बैंक आपको अपने मान्यता प्राप्त Collection and Purity Testing Centre (CPTC) में भेजेगा ।
  3. सोने की टेस्टिंग: CPTC में आपके सोने का वजन होगा और उसकी शुद्धता जांची जाएगी। गहनों में लगे पत्थर और गैर-सोने वाले धातु हटा दिए जाएंगे और आपको वापस कर दिए जाएंगे ।
  4. सर्टिफिकेट प्राप्त करें: CPTC आपको एक Provisional Certificate देगा जिसमें सोने की मात्रा और शुद्धता (995 purity के आधार पर) लिखी होगी ।
  5. रिफाइनिंग: आपके सोने को BIS-प्रमाणित रिफाइनर के पास भेजा जाता है, जहाँ इसे पिघलाकर 995 शुद्धता वाले ट्रेडबल गोल्ड बार में बदला जाता है ।
  6. गोल्ड डिपॉजिट सर्टिफिकेट (GDC): इसके बाद बैंक आपको Gold Deposit Certificate (GDC) जारी करता है ।
  7. ब्याज की शुरुआत: सोने के ट्रेडबल बार में बदलने की तारीख या बैंक में सोना जमा होने के 30 दिन के भीतर (जो भी पहले हो), आपका ब्याज शुरू हो जाता है ।

Collection and Purity Testing Centre (CPTC) क्या है?

gold locker in bank

CPTC वह भौतिक सुविधा है जहाँ आपके सोने की असल टेस्टिंग होती है। यह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा अधिकृत होते हैं ।

  • टेस्टिंग के तरीके: यहाँ XRF (X-Ray Fluorescence) और Fire Assay जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता है । यह पूरी प्रक्रिया आपके (जमाकर्ता के) सामने होती है ।
  • असली सच : आपके पुश्तैनी गहने पिघला दिए जाएंगे। अगर आप 22 कैरेट का 20 ग्राम गहना देते हैं, तो आपको केवल शुद्ध सोने का हिस्सा (लगभग 18.36 ग्राम 995 शुद्धता वाला) ही क्रेडिट होगा ।
  • बैंकों का CPTC और रिफाइनर्स के साथ त्रिपक्षीय समझौता होता है ।

Deposit Types — 2026 Update (सबसे बड़ा बदलाव)

26 मार्च 2025 को RBI और सरकार ने इस स्कीम का पूरा ढांचा बदल दिया । वित्तीय क्षेत्र में मेरे सालों के अनुभव में, यह एक बहुत बड़ा पॉलिसी शिफ्ट है।

पहले तीन तरह के डिपॉजिट होते थे:

  1. Short Term Bank Deposit (STBD) — 1 से 3 साल
  2. Medium Term Government Deposit (MLTGD) — 5 से 7 साल
  3. Long Term Government Deposit (LTGD) — 12 से 15 साल

2026 का नया नियम: सरकार ने 26 मार्च 2025 से MLTGD और LTGD को पूरी तरह बंद कर दिया है

  • अब कोई नया Medium या Long-Term अकाउंट नहीं खोला जा सकता ।
  • मौजूदा (पुराने) डिपॉजिट अपनी मैच्योरिटी तक चलेंगे, लेकिन उन्हें रिन्यू नहीं किया जा सकेगा ।

ऐसा क्यों किया गया? क्योंकि लंबे समय के डिपॉजिट्स में निवेशकों की कम दिलचस्पी थी, और सरकार/बैंकों पर इसका फिस्कल और ऑपरेशनल खर्च बहुत ज्यादा आ रहा था ।

क्या GMS में आपका सोना पूरी तरह से सुरक्षित है? 

“क्या मेरा सोना डूब तो नहीं जाएगा?” यह एक ऐसा सवाल है जो हर निवेशक मुझसे पूछता है।

  • DICGC Insurance की स्थिति: सामान्य बैंक FD में 5 लाख रुपये तक का DICGC बीमा होता है । लेकिन GMS के तहत जमा सोने पर मानक कैश डिपॉजिट की तरह DICGC बीमा लागू होने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं (grey area) है ।
  • पुराना vs नया रिस्क मॉडल: जो पुरानी MLTGD योजना थी, उसमें सरकार की गारंटी (Sovereign Guarantee) थी । लेकिन अब जो STBD (Short Term Bank Deposit) चल रहा है, उसका रिस्क पूरी तरह से बैंक के ऊपर है ।
  • मेरी राय: क्योंकि रिस्क अब बैंक पर है, इसलिए आपको छोटे या को-ऑपरेटिव बैंकों से बचना चाहिए। STBD के लिए हमेशा बड़े सरकारी (PSU) बैंकों का चुनाव करें जैसे SBI, Bank of Baroda, या PNB, क्योंकि इन्हें सरकार का परोक्ष समर्थन प्राप्त है । राहत की बात यह है कि 2015 से 2025 तक, इस स्कीम में किसी भी जमाकर्ता का पैसा या सोना डूबने की कोई घटना सामने नहीं आई है ।

gold jewelry purity certificate

2026 में कौन सी GMS स्कीम्स एक्टिव हैं?

जैसा कि मैंने ऊपर बताया, 2026 में केवल Short Term Bank Deposit (STBD) एक्टिव है ।

  • स्कीम का नाम: कई बैंक इसे Revamped Gold Deposit Scheme (R-GDS) के नाम से चलाते हैं ।
  • अवधि : न्यूनतम 1 साल से अधिकतम 3 साल तक ।
  • ब्याज दर : यह ब्याज बैंक खुद वहन करता है। 2026 में बैंक लगभग 0.5% से लेकर 2.5% सालाना तक का ब्याज दे रहे हैं ।
  • ब्याज का भुगतान हर साल 31 मार्च को या मैच्योरिटी पर एक साथ (cumulative) लिया जा सकता है।

GMS को सपोर्ट करने वाले टॉप 10 बैंक

सभी बैंक GMS ऑफर करने के लिए बाध्य नहीं हैं, यह उनकी अपनी इच्छा पर निर्भर है । 2026 में सक्रिय प्रमुख 10 बैंक ये हैं:

  1. State Bank of India (SBI): R-GDS स्कीम के नाम से सबसे बड़ा नेटवर्क।
  2. Bank of Baroda (BOB): लगभग 2.25% सालाना ब्याज (1-3 साल STBD के लिए) और 102 से ज्यादा अधिकृत शाखाएं।
  3. Punjab National Bank (PNB): चुनिंदा शाखाओं में STBD उपलब्ध।
  4. Indian Overseas Bank (IOB): STBD एक्टिव है।
  5. Canara Bank: दक्षिण भारत में मजबूत नेटवर्क।
  6. Union Bank of India: सक्रिय प्रतिभागी।
  7. HDFC Bank: प्राइवेट सेक्टर में सीमित शाखाओं के साथ।
  8. ICICI Bank: मुख्य रूप से मेट्रो शहरों में।
  9. Axis Bank: चुनिंदा शहरी शाखाओं में।
  10. Bank of India (BOI): सक्रिय PSU प्रतिभागी।

(नोट: बैंक जाने से पहले उनकी वेबसाइट पर GMS के लिए अधिकृत शाखाओं की लिस्ट जरूर चेक करें ।)

GMS के फायदे और नुकसान 

कोई भी निवेश एकदम परफेक्ट नहीं होता। आइए इसका निष्पक्ष विश्लेषण करें:

फायदे (Pros):

  • ब्याज की कमाई: जो सोना लॉकर में शून्य रिटर्न दे रहा था, उस पर अब आप 0.5% से 2.5% सालाना ब्याज कमा सकते हैं । यह सोने की कीमत बढ़ने के अतिरिक्त है ।
  • सुरक्षा का खर्च बचा: घर या लॉकर में चोरी का डर नहीं होता, और बैंक लॉकर का किराया भी बचता है ।
  • संस्थानों के लिए बेहतरीन: मंदिर ट्रस्ट (जैसे तिरुपति), कंपनियों और HUF के लिए भारी मात्रा में सोना जमा करने की कोई अधिकतम सीमा नहीं है ।

नुकसान (Cons):

  • गहनों का पिघलना (सबसे बड़ा कारण): आपको अपने पुराने या डिज़ाइनर गहने वापस नहीं मिलेंगे। उनकी कारीगरी हमेशा के लिए नष्ट हो जाएगी ।
  • लंबी अवधि का विकल्प खत्म: 5-15 साल वाले विकल्प (MLTGD/LTGD) अब बंद हो चुके हैं ।
  • कम ब्याज और टैक्स: 6-7% बैंक FD के मुकाबले 0.5-2.5% ब्याज बहुत कम है , और यह पूरी तरह टैक्सेबल भी है ।
  • CPTC की कमी: छोटे शहरों और गांवों में CPTC सेंटर आसानी से उपलब्ध नहीं हैं ।

मैच्योरिटी पर क्या होता है? 

GMS Maturity decision

जब आप स्कीम में प्रवेश करते हैं, तो आपको उसी समय चुनना होता है कि मैच्योरिटी पर आप अपना मूलधन (Principal) वापस सोने (Gold) के रूप में लेंगे या रुपये (Rupees) के रूप में

  • यह चुनाव अपरिवर्तनीय है: आप बाद में इसे बदल नहीं सकते ।
  • अगर आपने सोना चुना: तो आपको 995 शुद्धता वाले सोने के सिक्के या बार मिलेंगे, आपके मूल गहने नहीं ।
  • अगर आपने रुपये चुने: तो जमा किए गए सोने की उस समय (मैच्योरिटी के दिन) की मार्केट वैल्यू के हिसाब से पैसे आपके खाते में आ जाएंगे ।
  • ब्याज का भुगतान: ब्याज हमेशा भारतीय रुपये (INR) में ही दिया जाएगा ।

2026 में ब्याज और मैच्योरिटी पर टैक्स नियम 

फाइनेंशियल प्लानिंग में टैक्स का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

  1. ब्याज पर टैक्स (Tax on Interest): GMS से होने वाली ब्याज की कमाई “Income from Other Sources” के तहत आती है और यह आपके इनकम टैक्स स्लैब (जैसे 5%, 20%, या 30%) के अनुसार पूरी तरह टैक्सेबल है । बैंक इसमें TDS नहीं काटते, लेकिन आपको ITR में इसे दिखाना होता है ।
  2. मैच्योरिटी पर मूलधन पर टैक्स (Tax on Principal):
    • अगर सोना वापस लिया: जब आप अंततः उस सोने (ट्रेडबल बार्स) को बाजार में बेचेंगे, तो कैपिटल गेन्स टैक्स लगेगा । अगर होल्डिंग पीरियड 24 महीने से ज्यादा है (Finance Act 2024 के अनुसार), तो बिना इंडेक्सेशन के 12.5% Long Term Capital Gains (LTCG) टैक्स लगेगा ।
    • अगर रुपये वापस लिए: मैच्योरिटी के समय मिलने वाले रुपये और डिपॉजिट के समय सोने की कीमत के बीच का अंतर कैपिटल गेन्स माना जाएगा, और उसी 12.5% (LTCG) या स्लैब रेट (STCG) के हिसाब से टैक्स लगेगा ।

GMS vs Gold ETFs vs Sovereign Gold Bonds vs Gold Mutual Funds vs Digital Gold

गोल्ड में निवेश के लिए 2026 में क्या बेहतर है? यहाँ एक स्पष्ट तुलना दी गई है:

फीचरGMS (STBD)Sovereign Gold Bonds (SGB)Gold ETFsDigital Gold
फिजिकल गोल्ड चाहिए?हाँ (जमा करने के लिए)नहींनहींनहीं
ब्याज मिलता है?0.5–2.5% सालाना (रुपये में)2.5% सालानानहीं (सिर्फ प्राइस ग्रोथ)नहीं
रेगुलेशन / सुरक्षाबैंक रिस्क (STBD)भारत सरकार की सॉवरेन गारंटीSEBI रेगुलेटेडकोई सीधा रेगुलेशन नहीं (High Risk)
तरलता (Liquidity)कम (1 साल का लॉक-इन)कम-मध्यम (8 साल)बहुत ज्यादा (स्टॉक मार्केट में ट्रेड)बहुत ज्यादा
2026 में स्टेटसSTBD एक्टिव हैFY 2026-27 के लिए नई SGB रुकी हुई हैएक्टिवएक्टिव

मेरा नजरिया (My Take): चूंकि 2026-27 के लिए सरकार ने नए SGB जारी करने पर रोक लगा रखी है (Scheme Paused) , फ्रेश निवेश के लिए Gold ETFs आज के समय में सबसे पारदर्शी और बेहतरीन विकल्प हैं । लेकिन, अगर आपके पास पहले से भौतिक सोना (Physical Gold) मौजूद है जिसे आप बेचना नहीं चाहते, तो GMS ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जो उस सोने पर रिटर्न जनरेट कर सकता है ।

निष्कर्ष 

भारतीय निवेशकों को यह समझना होगा कि हर डेड एसेट आपकी वेल्थ क्रिएशन की रफ्तार को धीमा करता है। Gold Monetization Scheme (GMS) के 2025-2026 के अपडेट्स ने इस योजना को बैंकों के लिए आसान बनाया है, भले ही लंबे समय (MLTGD) के विकल्प बंद हो गए हों।

Key Takeaways:

  • GMS में निवेश तभी करें जब आपके गहनों से आपका कोई भावनात्मक जुड़ाव (Emotional attachment) न हो, क्योंकि वे पिघला दिए जाएंगे ।
  • 26 मार्च 2025 के बाद केवल 1-3 साल वाले STBD ही उपलब्ध हैं ।
  • सुरक्षा के लिहाज से STBD के लिए हमेशा बड़े PSU बैंकों (SBI, BOB, PNB) का ही चुनाव करें ।
  • ब्याज से होने वाली कमाई आपकी कुल आय में जुड़कर आपके टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगी।

सोने से प्यार करना गलत नहीं है, लेकिन अपने एसेट्स को काम पर लगाना एक स्मार्ट निवेशक की निशानी है। सही जानकारी और फाइनेंशियल प्लानिंग के साथ अपने फैसले लें।

हैप्पी इन्वेस्टिंग!

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Disclaimer: यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है और इसे किसी भी प्रकार की वित्तीय, कानूनी, या निवेश सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। Gold Monetization Scheme से संबंधित ब्याज दरें, टैक्स नियम, और सरकारी नीतियाँ समय-समय पर बदलती रहती हैं; इसलिए निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार या संबंधित बैंक से नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त करें। लेखक या प्रकाशक इस जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी वित्तीय लाभ या हानि के लिए उत्तरदायी नहीं हैं।

About Author:

Ishwar एक फाइनेंस ब्लॉगर हैं और PaisaForever के निर्माता हैं। वह भारतीय पाठकों के लिए निवेश, शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, क्रिप्टो और वित्तीय योजना जैसे विभिन्न विषयों पर लिखते हैं।
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Ishwar Bulbule

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